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Tuesday, September 2, 2008

few old but gold

ये लहरें किनारों को चूमकर वापस क्यो जाती हैं,
ये ज़मीन आसमान को क्यूं छू नही पति हैं,
क्यूं याद आती हो फ़िर वाही याद बनाकर,
के ये जिन्दगी तुमसे जुदा ही नही होना चाहती हैं.

ख़ुद की मोह्होबत फन्नाह कौन करेगा,
सब नेक बनगए तो गुन्नाह कौन करेगा,
ये खुदा, सलामत रखना मेरे सनम बेवफा को,
वरना मेरे मौत की दुआ कौन करेगा.

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